Tuesday, 3 October 2017
विज्ञप्ति भर बारिश - हिंदी कविता संग्रह
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विज्ञप्ति भर बारिश |
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https://www.amazon.in/VIGPATI-BHAR-BARIS-OM-NAGAR/dp/B078WVR3Y6/ref=sr_1_1?s=books&ie=UTF8&qid=1547543009&sr=1-1&keywords=om+nagar
अब तो बरसाते बलती आग - काला बादल
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| अब तो बरसाते बलती आग - काला बादल |
यूं तो मनु-जीवन की साथकता मानवता की सेवा-उान मअिधक है। लेिकन एक अदद िजगी देश सेवा को समिपत कर भावी पीिढय़ोंके िलए रेणा बन जाना बड़ेजीवट का काम ह। जीवन -संघषको अपनी असल ताकत बनाकर गांव-गांव आजादी की अलख जगानेवालेकलम के सेिसपाही लोककिव भैरवलाल कालाबादल तंता के पथ पर एक बार चलना शु ए तो िफर न के और न थके। रोजी-रोटी के िलए की िजसाजी श की ताकत को पहचान लेनेके बाद कालाबादल का शोंऔर िकताबोंकभी नाता नहींटूटा। रोजी-रोटी के िलए िकताबो (ं पोिथयो ) ं की िजसाजी का काम िकया। कालाबादल आजादी की िणम पोथी के ऐसेअनूठे िजसाज थे, िजोनं ेअपनेगीतोंसेजन-जन मराीय चेतना का संचार िकया। उोनं ेजीवनयापन के िलए रामगंजमंडी मिजसाजी व साबुन की दुकान खोली। अपनेगु पंिडत नयनूराम शमाके सहयोग से रामगंजमंडी मही पुकालय की थापना की और जनजागृित मजुट गए। नयाबास मिकया अापन बमुल सातवींजमात तक िशा हािसल करनेमकामयाब रहेकाला बादल नेअपनेजीवन मन केवल िशा के मह को समझा ब नयाबास ूल मपांच वषतक अापन कर भावी पीढ़ी को आखर- उजास भी बांटा। कालाबादल जीवन पयत कई मोच पर एक साथ लड़े-िभड़ेऔर जहां रहेवहां ईमानदारी -साई का परचम फहराया। 1936 मजामंडल की ली सदता भारत माता को दासता के बंधन सेमु के िलए देश-देश के हजारो-ं हजार लोगोंनेतन-मन-धन ोछावर िकया। ऐसेमभला हाड़ौती अंचल कैसेपीछेरहता। इस िमी मऐसेकई सपूत जे, िजोनं ेसूणजीवन देश के िलए समिपत कर िदया। इींमसेएक नाम कालाबादल का हैजो जीवनभर महाा गांधी के आदश के अनुयायी रह। 1936 मखानपुर सेजामल के सिय सद के प माधीनता संाम सेएक बार जुड़ेतो िफर तंता का नूतन सूरज उगनेतक कभी मुड़कर नही देखा। वो चाहे 1942 का 'भारत छोड़ो आंदोलन' हो या िफर िवनोबाजी का भूदान आंदोलन। जामल के ित जागकता को लेकर उद्घोष िकया- थाा थांका जुा सूं, जामल खोलगा। छाना रहबा को यो ऑडर तोड़ा, सुख सूं बोलगा।। गीतोंसेजगाई आजादी की अलख हाड़ौती अंचल के पहलेअनूठेलोककिव कालाबादल नेअपनेगीतोंको बड़ी ताकत बनाया और गांव-गांव जाकर गीतोंके माम सेलोगोंके मन मन केवल आजादी की चाह पैदा की ब िकसानो,ंवंिचतोंऔर शोिषतोंका दु:ख-ददको खर र िदया। उनमहक के िलए लडऩेकी िजद पैदा की। कालाबादल िकसानोंव सामािजक प सेिपछड़ोंके उान के िलए सदैव ही यशील रहे। उनके िस गीत 'काला बादल रे! अब तो बरसा दे बळती आग' की कुछ पंयां इस कार ह... काला बादल रेअब तो बरसा देबळती आग बादल राजा कान िबना रे, सुणेन ाकी बात। थारा मन की तूकरे, जद चालेवांका हाथ।। कसाई लोग खीचता ं रहे, मरी गाय की खाल। खीचं ेहाकम हारा, येकरसाणा की खाल।। माल खावेचोरड़ा रे, खावेकरज खलाण। कचेिडय़ां महाकम खावे, भूखा कं त का ाण।। फटी धोवती, फटी अंगरखी, फूा ाका भाग। काला बादल रेअब तो बरसा देबळती आग।। 'आजादी की लहर' पर लगा ितबंध कालाबादल संरणोंमतीन गीत संह के काशन का िज करतेह- 'गांवोंकी पुकार', 'आजादी की लहर' और 'सामािजक सुधार'। इनमआजादी की लहर पुक को अंेज सरकार के ारा ितबंिधत भी िकया गया, 10/4/2017 Bhairav Lal Kala badal Awakening freedom With songs of consciousness आजादी की िणम पोथी के अनूठेिजसाज: काला बादल Patrika Hindi https://www.patrika.com/kota-news/bhairav-lal-kala-badal-awakening-freedom-with-songs-of-consciousness-1-1777277/ 2/2 लेिकन आजादी का यह परवाना कब हार माननेवाला था। अपनेगीतोंमशोंका बाद भरकर अंेज शासन और जागीरदारोंकी नीदं उड़ातेरहे। नेह नेिदया 'कालाबादल' नाम अपनेसंरणोंमिज करतेए काला बादल िलखतेहिक सन 1946 मउदयपुर मदेशी रा लोक परषद सेलन का आयोजन िकया गया। िजसमपंिडत जवाहर लाल नेह नेभी िशरकत की थी। भैरव लाल की यंसेवक के प मूटी नेह को जहां ठहराया गया था, वहां लगी। एक िदन पहलेरात 2 बजेनेह िवाम के िलए आवास पंचे। इस बीच पहरेपर तैनात भैरवलाल को नीदं आनेलगी तो 'कालाबादल रे, अब तो बरसा देबळती आगÓ गीत गाना शु कर िदया। नेह नेसुना तो उोनं ेयंसेवकोंसेभैरव लाल को अपने क मबुलाया और पूरा गीत सुना। दूसरेिदन सेलन मनेह नेमंच सेकालाबादल गीत वालेयंसेवक से अपना गीत सुनानेके िलए आवाज लगवायी। गीत को लोगोंनेखूब पसंद िकया और उसी िदन सेनेह ारा िदए गए उपनाम सेभैरवलाल, कालाबादल हो गए। िवधायक और मं◌ी भी रहे कालाबादल राजथान की थम िवधानसभा सन् 1952 मदो वष, 1957,1967 और सन 1977 मिवधानसभा के सद रहे। सन् 1978 से 1980 तक जनता पाट सरकार मआयुवद रा मंी रहे। 1967 से 1976 तक राजनीित सेसंास लेकर समाज सेवा के काय सेजुड़ गए और 'मीणा-संसार' पिका का सादन भी िकया। संरण और का संह का िवमोचन कालाबादल के संरण व का संह ''काला बादल रे! अब तो बरसा देबलती आग' का सादन कोटा के युवा किव एवं लेखक रामनारायण मीना 'हलधर' और डॉ. ओम नागर नेिकया है। ीमीना समाज िवकास सिमित की ओर सेकािशत पुक मउनके जीवन -संरण, सघष, तंता आोलन मउनकी सिय भूिमका के साथ ही उनके हाड़ौती के लोकिय गीत-किवताओंको शािमल िकया गया है। पुक का िवमोचन सोमवार को नगर िवकास ऑिडटोरयम महोगा।
परिचय
डॉ. ओम नागर
----------------------
जन्म: 20 नवम्बर, 1980, अन्ताना, तह. अटरु, जि. बाँरा (राज.)
शिक्षा: एम. ए. (हिन्दी एवं राजस्थानी) पीएच-डी, बी.जे.एम.सी.
प्रकाशन:
01." निब के चीरे से ‘‘( कथेत्तर गद्य -डायरी ) -2016 प्रकाशक-भारतीय ज्ञानपीठ,नयी दिल्ली
02." विज्ञप्ति भर बारिश"( हिंदी कविता संग्रह)-2015
प्रकाशक-सूर्य प्रकाशन मन्दिर,बीकानेर
3." देखना एक दिन"( हिंदी कविता संग्रह )-2009
प्रकाशक-विकास प्रकाशन,बीकानेर
04.‘‘जद बी मांडबा बैठूं छूँ कविता’’ (राजस्थानी काव्य
संग्रह)-2011
05." प्रीत"( राजस्थानी काव्य संग्रह)-2005
06 " छियापताई"( राजस्थानी काव्य संग्रह )-2003
राजस्थानी अनुवाद -
01. ‘‘जनता बावळी हो’गी’’ (श्री शिवराम के लघु नाटक 2009
02.‘‘कोई ऐक जीवतो छै’’ कवि श्री लीलाधर जगूड़ी के हिंदी कविता संग्रह ‘‘अनुभव के आकाश में चांद’’ का
राजस्थानी अनुवाद-2014
प्रकाशक-साहित्य अकादेमी
03. ‘‘दो ओळ्यां बीचै’’ श्री राजेश जोशी के कविता संग्रह ‘‘दो पंक्तियों के बीच’’ ( राजस्थानी अनुवाद ) साहित्य अकादमी द्वारा अनुवाद योजना के अन्तर्गत प्रकाशित।
प्रकाशन व प्रसारण:
देश की प्रमुख हिन्दी व राजस्थानी पत्र पत्रिकाओं में रचनाएॅ प्रकाशित। आकाशवाणी कोटा, जयपुर और जयपुर दूरदर्शन से समय-समय पर प्रसारण।
रचना अनुदित: पंजाबी, गुजराती, नेपाली, संस्कृत और कोंकणी। वागर्थ, परिकथा, संवदिया के युवा कविता विशेषांक व राजस्थानी युवा कविता संग्रह ‘मंडाण’ में कविताओं का अनुवाद। पहली कविता
2004 में 'साहित्य अमृत' में प्रकाशित।
* साहित्य अकादेमी की अंग्रेजी पत्रिका " इंडियन लिटरेचर" के विशेष अंक-INDIA UNDER-40 में
कविताएँ प्रकाशित।
संपादन:
01.राजस्थानी-गंगा (हाड़ौती अंचल विशेषांक)
02.' काला बादल रे! अब तो बरसादे बळती आग"
( स्वतंत्रता सेनानी-लोककवि भैरव लाल कालाबादल के संस्मरण और काव्य)
पुरस्कार व सम्मान:
01 . कथेतर गद्य की पांडुलिपी "निब के चीरे से " के लिए भारतीय ज्ञानपीठ का नवलेखन पुरस्कार -2015
02 . केन्द्रीय साहित्य अकादमी नई दिल्ली द्वारा राजस्थानी कविता संग्रह ‘‘जद बी मांडबा बैठू छूँ कविता’’ पर ‘‘युवा पुरस्कार-2012’’
03 . राजस्थान साहित्य अकादमी, उदयपुर द्वारा हिन्दी कविता संग्रह ‘देखना, एक दिन’ पर सुमनेश जोशी पुरस्कार, 2010-11
04 . राजस्थानी भाषा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी, बीकानेर द्वारा शिवराम के जननाटक ‘‘जनता पागल हो गई है’’ के राजस्थानी अनुवाद ‘‘जनता बावळी होगी’’ पर ‘‘बावजी चतरसिंह’’ अनुवाद पुरस्कार- 2011-12
05 . प्रतिष्ठित साहित्य पत्रिका "पाखी " द्वारा "गांव में दंगा " कविता के लिए "शब्द साधक युवा सम्मान -2015
06 . राजस्थान सरकार जिला प्रशासन बारां व कोटा, काव्य मधुबन, अखिल भारतीय साहित्य परिषद, आर्यवर्त साहित्य समिति, भारतेंदु समिति ,शिक्षक रचनाकार मंच, धाकड़ समाज पंचायत सहित कई साहित्यिक एवं स्वयंसेवी संस्थाओं द्वारा सम्मानित।
संप्रति: लेखन एवं पत्रकारिता
पता: 3-ए-26, महावीर नगर तृतीय, कोटा - 324005(राज.)
मोबाइल-9460677638,8003945548
Email-omnagaretv@gmail.com
https://dromnagar.blogspot.in/
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जन्म: 20 नवम्बर, 1980, अन्ताना, तह. अटरु, जि. बाँरा (राज.)
शिक्षा: एम. ए. (हिन्दी एवं राजस्थानी) पीएच-डी, बी.जे.एम.सी.
प्रकाशन:
01." निब के चीरे से ‘‘( कथेत्तर गद्य -डायरी ) -2016 प्रकाशक-भारतीय ज्ञानपीठ,नयी दिल्ली
02." विज्ञप्ति भर बारिश"( हिंदी कविता संग्रह)-2015
प्रकाशक-सूर्य प्रकाशन मन्दिर,बीकानेर
3." देखना एक दिन"( हिंदी कविता संग्रह )-2009
प्रकाशक-विकास प्रकाशन,बीकानेर
04.‘‘जद बी मांडबा बैठूं छूँ कविता’’ (राजस्थानी काव्य
संग्रह)-2011
05." प्रीत"( राजस्थानी काव्य संग्रह)-2005
06 " छियापताई"( राजस्थानी काव्य संग्रह )-2003
राजस्थानी अनुवाद -
01. ‘‘जनता बावळी हो’गी’’ (श्री शिवराम के लघु नाटक 2009
02.‘‘कोई ऐक जीवतो छै’’ कवि श्री लीलाधर जगूड़ी के हिंदी कविता संग्रह ‘‘अनुभव के आकाश में चांद’’ का
राजस्थानी अनुवाद-2014
प्रकाशक-साहित्य अकादेमी
03. ‘‘दो ओळ्यां बीचै’’ श्री राजेश जोशी के कविता संग्रह ‘‘दो पंक्तियों के बीच’’ ( राजस्थानी अनुवाद ) साहित्य अकादमी द्वारा अनुवाद योजना के अन्तर्गत प्रकाशित।
प्रकाशन व प्रसारण:
देश की प्रमुख हिन्दी व राजस्थानी पत्र पत्रिकाओं में रचनाएॅ प्रकाशित। आकाशवाणी कोटा, जयपुर और जयपुर दूरदर्शन से समय-समय पर प्रसारण।
रचना अनुदित: पंजाबी, गुजराती, नेपाली, संस्कृत और कोंकणी। वागर्थ, परिकथा, संवदिया के युवा कविता विशेषांक व राजस्थानी युवा कविता संग्रह ‘मंडाण’ में कविताओं का अनुवाद। पहली कविता
2004 में 'साहित्य अमृत' में प्रकाशित।
* साहित्य अकादेमी की अंग्रेजी पत्रिका " इंडियन लिटरेचर" के विशेष अंक-INDIA UNDER-40 में
कविताएँ प्रकाशित।
संपादन:
01.राजस्थानी-गंगा (हाड़ौती अंचल विशेषांक)
02.' काला बादल रे! अब तो बरसादे बळती आग"
( स्वतंत्रता सेनानी-लोककवि भैरव लाल कालाबादल के संस्मरण और काव्य)
पुरस्कार व सम्मान:
01 . कथेतर गद्य की पांडुलिपी "निब के चीरे से " के लिए भारतीय ज्ञानपीठ का नवलेखन पुरस्कार -2015
02 . केन्द्रीय साहित्य अकादमी नई दिल्ली द्वारा राजस्थानी कविता संग्रह ‘‘जद बी मांडबा बैठू छूँ कविता’’ पर ‘‘युवा पुरस्कार-2012’’
03 . राजस्थान साहित्य अकादमी, उदयपुर द्वारा हिन्दी कविता संग्रह ‘देखना, एक दिन’ पर सुमनेश जोशी पुरस्कार, 2010-11
04 . राजस्थानी भाषा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी, बीकानेर द्वारा शिवराम के जननाटक ‘‘जनता पागल हो गई है’’ के राजस्थानी अनुवाद ‘‘जनता बावळी होगी’’ पर ‘‘बावजी चतरसिंह’’ अनुवाद पुरस्कार- 2011-12
05 . प्रतिष्ठित साहित्य पत्रिका "पाखी " द्वारा "गांव में दंगा " कविता के लिए "शब्द साधक युवा सम्मान -2015
06 . राजस्थान सरकार जिला प्रशासन बारां व कोटा, काव्य मधुबन, अखिल भारतीय साहित्य परिषद, आर्यवर्त साहित्य समिति, भारतेंदु समिति ,शिक्षक रचनाकार मंच, धाकड़ समाज पंचायत सहित कई साहित्यिक एवं स्वयंसेवी संस्थाओं द्वारा सम्मानित।
संप्रति: लेखन एवं पत्रकारिता
पता: 3-ए-26, महावीर नगर तृतीय, कोटा - 324005(राज.)
मोबाइल-9460677638,8003945548
Email-omnagaretv@gmail.com
https://dromnagar.blogspot.in/
Wednesday, 20 September 2017
📓🖋🖋🖋लेखक की कलम से 🖋🖋🖋📓
गत एक-डेढ़ दशक से साहित्य की विभिन्न विधाओं, खासतौर पर कविताओं का प्रकाशन पत्र-पत्रिकाओं में निरन्तर होता रहा। लेकिन इस यात्रा में कुछ ऐसा भी रहा जो मुझ अकिंचन रचनाकार के लिए स्मृति की बड़ी पूँजी बना है। जैसे पहली कविता का प्रकाशन -( साहित्य अमृत-दीपावली विशेषांक-2004,संपादक -विद्यानिवास मिश्र जी) ऐसा ही अप्रत्याशित रहा जब हिंदी की प्रतिष्ठित पत्रिका " वागर्थ " के संपादक- विजय बहादुर सिंह जी ने मेरी कविता " समय " को पत्रिका के अग्रिम पृष्ठ पर स्थान दिया। कभी न बिसरने वाले लम्हें तो और भी है फिलहाल कविता -" समय " आपके लिए
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अब तो बरसाते बलती आग - काला बादल यूं तो मनु-जीवन की साथकता मानवता की सेवा-उान मअिधक है। लेिकन एक अदद िजगी देश सेवा को समिपत क...
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केंद्रीय साहित्य अकादेमी,नयी दिल्ली का राजस्थानी कविता संग्रह-" जद बी मांडबा बैठूँ छूँ कविता " के लिए" युवा पुरस्कार-...







